बादशाह - The Khan
सन 1980, दिल्ली के एक अस्पताल में एक 15 साल का लड़का अपनी माँ के साथ
ऑपरेशन थिएटर के बाहर बैठा था| ऑपरेशन थिएटर में डॉक्टर उस लडके के पिताजी का इलाज
कर रहे थे| ऑपरेशन थिएटर का दरवाज़ा खुलते ही मरीज की सांसे बंद होने की खबर मिली|
वो लड़का अपनी रोती हुई माँ को लेकर अस्पताल के बाहर पहुँचा| वहाँ उनकी कार तो थी,
पर ड्राईवर इंतजार में थक कर घर चला गया था|
लड़के ने अपनी माँ को कार में बिठाया और खुद ड्राईवर कि सीट पर बैठकर
कार चलाने लगा| रस्ते में दोनों ने एक दुसरे से कोई बात नही की, पर जैसे ही कार घर
के सामने रुकी तो माँ जैसे एक सदमे से जागी और बोली,”बेटे तू ने कार चलाना कब सीखा?”
लड़के ने जवाब दिया,”बस अभी सीखा |” उस लड़के के इसी आत्मविश्वास और साहस ने उसे
बॉलीवुड का ‘किंग खान’ बनाया|
एक दिन शाहरुख़ के पिताजी उन्हें फिल्म दिखाने ले गए, पर टिकट के लिए
पैसे कम पड़ गए तो शाहरुख़ के पिताजी ने मूंगफली खरीदी और शाहरुख़ के साथ सडक के
किनारे बैठ गए, और शाहरुख़ से बोले,”ये आती जाती गाड़ियाँ कितनी खूबसूरत
हैं......चलो आज इन्ही को देखते हैं|” पर शाहरुख़ की बेमिसाल मेहनत ने पासा पलट
दिया, आज लोग लाइन में लगकर उनकी फिल्मों की टिकट खरीदते हैं|
अगर शाहरुख़ की शुरुवाती जिन्दगी बड़े ही मुस्किल दौर से गुजरी है| वो
एक माध्यम वर्गीय परिवार का हिस्सा थे| उनके पिताजी को बिजनेस में काफी नाकामियों
का सामना करना पड़ा| शाहरुख़ महज़ 15 साल के थे जब कैन्सर से उनके पिताजी की मृत्यु
हो गयी, और इसी घटना के 10 साल बाद ही शाहरुख़ की माँ भी इस दुनिया से रुक्सत हो गयीं|फिर भी शाहरुख़ ने
अपनी पढाई जारी रखी| उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में ग्रेजुएशन
करने के बाद जामियाँ से मॉस कम्युनिकेशन कर लिया|
शाहरुख़ का सफ़र छोटे पर्दे के ‘फौजी’ सिरिअल से शुरू हुआ| दरअसल ये
सीरियल शाहरुख को इस वजह से मिला क्योंकि जिसे लेकर ये सीरियल बनना था, उसने ये
सीरियल करने से इनकार कर दिया था| ‘दूरर्शन’ चैनल पर आए इस सीरियल ने शाहरुख़ खान
की प्रतिभा को दूर-दूर तक पहुँचाया| शाहरुख़ के अभिनय से प्रभावित होकर अभिनेत्री
हेमा मालिनी ने शाहरुख़ को फ़ोन करके उनके साथ फिल्म बनाने की इच्छा ज़ाहिर की|
शाहरुख़ को लगा कि कोई फ़ोन पर उनके साथ मजाक कर रहा है इसलिए उन्होंने चुफाप होने
रख दिया|
इसी दौरान शहरुख को गौरी नाम की एक लड़की स मोहब्बत हो गई| जब गौरी के
घरवालों को शाहरुख़ और गौरी करीबी का पता चला तो उन्होंने गौरी को मुंबई में उसके
मामा के घर रहने भेज दिया| गौरी के माता-पिता को शाहरुख़ से इसलिए था कि शाहरुख़ के न
ही माँ-बाप थे और न ही शाहरुख़ का कोई स्थाई भविष्य था| गौरी के मुंबई चले जाने के
बाद शाहरुख़ दिल्ली में बेहद अकेले हो गए| पर फासले मोहब्बतों को कब मिटा पाई है|
शाहरुख़ ने गौरी की तलाश में मुंबई का रुख किया|
मुंबई में शाहरुख़ बिल्कुल
दीवानों की तरह गौरी की तलाश करने लगे| शाहरुख़ का बहुत सारा पैसा गौरी कि तलाश में
और खाने में खर्च हो गया| शाहरुख़ के पास इतने भी पैसे नही थे कि वो वापस ट्रेन पकड़
कर दिल्ली जा सकें| तभी अचानक एक बिच (beach) पर उनकी मुलाक़ात गौरी से हुई, गौरी न
शाहरुख़ से कहा,”तुम मेरे मामा-मामी से बात करो......वो शायद मेरे पापा को मना
लेंगें|”
इस दौरान शाहरुख़ की माली हालत बहुत ख़राब हो गई थी| पैसे न होने के बजह
से शाहरुख़ को कुछ रातें सड़को पर और रेलवे पल्त्फोर्म पर काटनी पड़ी| पैसों की
किल्लत के वजह से शाहरुख़ को अपना कैमरा भी बेचना पड़ा| एक रात वो बांद्रा में
बिरयानी खा रहे थे| तभी विकास वासवानी नाम के एक प्रोडूसर उनके पास आए और उन्होंने
शाहरुख़ से फिल्मों में काम करने के लिए पूछा| बस यहीं से शाहरुख़ को रईस बनने का
मौका मिल गया|
अगले दिन शाहरुख़ को जी.पी. सिब्बी की फिल्म मिल गई| उसी दिन शाहरुख़
हेमा मालिनी से मिलने चले गए, हेमा जी की बदौलत शाहरुख़ को ‘दीवाना’ फिल्म मिल गई
और इसी तरह शाहरुख़ खान ने एक ही दिन में 5 फिल्में साइन कर दी, इसी के तीन महीने बाद
शाहरुख़ और गौरी की शादी हो गई|
सलमान ने मना की हुई ‘बाज़ीगर’ और आमिर की इनकार की हुई ‘दर’ फिल्म भी
शाहरुख़ खान के हिस्से में आई, और इन फिल्मों के शाहरुख़ को किसी परिचय के मोहताज
नही रहे| शाहरुख़ के सितारे आज भी बुलंदियों पर हैं, पर आज भी शाहरुख़ को इस बात का
अफ़सोस है कि शाहरुख़ की कामयाबी उनके माता-पिता नही देख सके| शाहरुख़ को उनके पिताजी
की एक बात ने हमेशा प्रेरित करती है, उनके पिताजी ने कहा था ,”जो कुछ नही करते वो
कमाल करते हैं ....!”
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अगर आप शाहरुख़ खान की ज़िन्दगी से प्रभावित हैं, तो ये आर्टिकल जरुर
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