Posts

Showing posts from January, 2017

बोझ

Image
मैं अपनी हथेली पर बी.ए. की डिग्री का बोझ लिए नौकरी की तलाश में कई दफ्तरों की खाक छान रहा था | मुझे नौकरी की शख्त जरुरत थी, क्योंकि मुझ पर जिम्मेदारियों का बोझ बढ़ गया था | मेरे बाबूजी दूसरों के खेत में मजदूरी करते थे | मैं दोपहर को उन्हें खाना पहूँचाने जाया करता था | मैंने बाबूजी से कहा,"बाबूजी, जब कोई नौकरी नही मिल जाती, तब तक मैं खेती ही कर लूँ,?" बबुजी बोले,"बेटा खेती गंवारो का काम है,थोड़ी इन्तजार करो नौकरी मिल जाएगी |" मुझे एक छोटी-सी नौकरी तो मिल गयी,पर पहली तनखा मिलने से पहले ही बाबूजी की तबीयत काफी बिगड़ गयी | अस्पताल बहुत दूर होने वजह से पैसे तो गाड़ी के किराये में ख़त्म हो जाते थे, दवाईयाँ मेरी हैसियत से बाहर हो गयीं | डाक्टर ने कुछ बवाएं लाने को कहा पर मेरे पास दवा के पुरे पैसे नही थे| मैं अस्पताल से बाहर आकर सामने के बस स्टैंड पर बैठकर अपने आप पर तरस खा रहा था| मैं हताश और बेबस होकर जमीन की ओर देख रहा था तभी किसी ने आवाज दी,"यहाँ क्या बस का इन्तजार कर रहे हो ?" ये आवाज मंजूषा की थी उसने अपनी कार की तरफ इशारा करते हुए कहा," हम गो...